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  • Writer's pictureKishori Raman

ख़ुशी बॉटने का पर्व - दीपावली


दीपावली खुशिओं और उल्लास का पर्व है जिसमे खुशियाँ बॉटने से और बढ़ती है। ये पर्व न सिर्फ बच्चों के मन को उत्साह से भरती है बल्कि बड़े बुजुर्गों में भी नई ऊर्जा का संचार करती है। आजकल हर धर्म के लोग बिना किसी धार्मिक भेदभाव के एक दूसरे की खुशी और त्योहारों में शामिल होते है। दीपावली, ईद, क्रिसमस जैसे त्योहार तो हम सबके साँझे विरासत हैं। ये न केवल आपसी प्यार और भाईचारे को मजबूत करता है बल्कि लोकतंत्र को ताकत भी देता है। दीपावली का यह त्योहार अपने अंदर की गन्दगी को साफ करने का भी प्रतीकात्मक पर्व है। आत्मज्ञान और शिक्षा के प्रकाश से अपने अंदर के अंधविश्वास और अन्य बुराईयों से छुटकारा पाने का पर्व है। आज अन्य त्योहारों की तरह दीपावली के त्योहार में भी प्यार और उल्लास कम तथा दिखावा ज्यादा हो गया है। आज हम पारम्परिक दियों एवं सजावटी सामानों के बदले आयातित तथा रसायन युक्त बिदेसी सामानो का प्रयोग कर रहें हैं। इससे न सिर्फ प्रदूषण बढ़ रहा है बल्कि हमारी भावी पीढ़ी पर इसका बुरा असर पड़ रहा है। पटाखों के अन्धाधुन्ध प्रयोग चिंता का विषय है। इसके कारण इन दिनों में प्रदूषण इतना बढ़ जाता है कि बड़े-बुजुर्ग तथा हमारे पालतू जानवर बीमार पड़ जाते हैं। आईये, हम सब मिलकर ये संकल्प ले कि इस बार दीपावली पर्व को पटाखों एवं प्रदूषण से मुक्त कर हर्षोल्लास के साथ इसे मनाएँगे। देसी दिए और अन्य सामानो का प्रयोग करेंगे। गरीब बच्चो एवं अन्य जरूरतमंदों की मदद कर उनके चेहरों पर खुशी लाएगें। किशोरी रमण BE HAPPY....BE ACTIVE...BE FOCUSED...BE ALIVE If you enjoyed this post, please like , follow,share and comments. Please follow the blog on social media.link are on contact us page. www.merirachnaye.com


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