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  • Writer's pictureKishori Raman

कविता " ज़िन्दगी और मौत "


ज़िन्दगी और मौत एक सिक्के के दो पहलू हैं दोनों ही इस सृष्टि की खूबसूरत ऋचाएँ है ज़िन्दगी बीत गयी इस पहेली को सुलझाने में पर आज तक भी इसे सुलझा नही पायें हैं ज़िन्दगी तो मौत के बिना अधूरी होती है दोनों जब मिलते हैं तभी ये पूरी होती है यहाँ किसी को शिकायत होती है मौत से तो किसी के लिए जीना मजबूरी होती है पहले कुछ दिनों तक अपनो की याद रुलाती है फिर नेम-प्लेट से नाम की स्याही उतर जाती है यही है ज़िन्दगी और यही है यहाँ का दस्तूर घर के किसी कोने में उनकी तस्वीर टंग जाती है सोंचा था,समय आनेदो,अपने कल को पुकारूँगा जिससे कभी जीत न सका उसे मैं ललकारूँगा कल सिकंदर को मैंने जब मिट्टी में दफन देखा तब समझ आया, यहाँ सब हारे है,मैं भी हारूँगा किशोरी रमण BE HAPPY....BE ACTIVE...BE FOCUSED...BE ALIVE If you enjoyed this post, please like , follow,share and comments. Please follow the blog on social media.link are on contact us page. www.merirachnaye.com




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